महाराष्ट्र : ठाणे, मीरा भयंदर महानगरपालिका, टैक्स भरे जनता माल काटे अधिकारी मलाई खाए ठेकेदार, नीचे दिए गए फोटो में आप मीरा भयंदर महानगर पालिका द्वारा लाखों रुपए खर्च कर जनता के पैसे से ठेकेदार और अधिकारी कमीशन खोरी कर लागत मूल्य से अधिक रुपयों का संसाधन जनता के लिए कम अपने लिए ज्यादा करने में दिन रात लगे रहते हैं। तकरीबन 1 महीने से मैं देख रहा हूं कि गोल्डन नेस्ट सर्कल पर लाखों रुपए खर्च कर हाई मास्क लाइट लगाया गया है जिसमें 13 में से सात लाइटें बंद है तथा उसी के बगल में नया नगर जाने वाले रास्ते पर हाई मास्क लगभग सभी लाइटें बंद है वहां से लेकर मैक्सिस मॉल ब्रिज के ऊपर हर अल्टरनेटिव लाइट बंद है मैक्सिस मॉल सर्कल का सिग्नल भी गरीबन दो ढाई महीने से यही हाल है इस सर्कल से सिग्नल से लेकर सुभाष चंद्र मैदान तक रास्ते में पड़ने वाले अल्टरनेटिव लाइट ज्यादातर बंद ही रहती है। किसी को कोई पडी नहीं है यह देख कर बहुत कष्ट होता है। गोल्डन में सर्कल काशीमीरा आते समय दीपक हॉस्पिटल सर्कल पर भी सिग्नल लाइट काफी दिनों से बंद पड़ा है अब सवाल बंद चालू का नहीं है मीरा भाईंदर महानगरपालिका ...
खांबीत के "खंभे" पर अटकी जानकर की "जान "
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खांबीत के "खंभे" पर अटकी जानकर की "जान "
आरटीआई के"४४0 वोल्ट"के झटके से ठेकेदार"बेहाल "
महाराष्ट्र के जिला ठाणे , मिरा भायंदर कि महानगर पालिका जो सन २००२ में नगरपरिषद से महानगर पालिका बनकर अस्तित्व में आयी। मुंबई से सटे होने के कारण लोगो का झुकाव इस तरह दिन दुगनी बढ़ने लगा। जनसँख्या के साथ साथ लोगो के जरुरी संसाधन जुटाने का काम यहाँ कि नगर पालिका पर प्रतिदिन बढ़ने लगा। जिसमे सड़क ,बिजली ,जल ,घनकचरा और साथ ही साथ अतिक्रमण। पहले ग्राम पंचायत फिर नगर परिषद् / नगर पालिका अब मिरा भायंदर "महानगर पालिका" बनने से आवश्यक जनउपयोगी संसाधन जुटाने हेतु कर्मचारीओ की कमी पड़ने पर कर्मचारीओ कि नियुक्ति ठेका पद्धत से पालिका करने लगी। कुछ चतुर प्रवत्ति तथा चापलूसी प्रवत्ति के ठेका पद्दत से आये "ठेका अधिकारी" यहाँ की राजनीती को समय के हिसाब से समझ कर "समय - समय" पर जनता द्वारा चुने गए "नेताओ " कि चाटुकारिता कर पक्ष व् विपक्ष के दलों के भावनाओ से साथ "आर्थिक व मानसिक" साथ देकर जल्द ही नेताओ के लोकप्रिय अधिकारी बन "मनपा" पर "एक छत्र" राज करने लगे। जब जब ईमानदार सत्ता पक्ष को इस बात का आभास हुआ ऐसे "ठेका कर्मचारी " को निकलने की कवायत शुरू हुई तब- तक प्रतिपक्ष द्वारा महा सभा में इसका विरोध हुआ। क़ानूनी प्रक्रिया को जानबूछ कर सरल बनाकर पुनः ऐसे "ठेका अधिकारी" को मनपा में उसी पद पर बैठाना पड़ा। यह खबर उस समय के हर अख़बार और जनता के बीच चर्चा का विषय रहा और आज भी है। समय के साथ साथ ऐसे "ठेका अधिकारी" की पदोन्नती के साथ - साथ वेतन और सुख सुविधा में भी तररकी हुयी । इस "ठेका अधिकारी" ने यहाँ जनता के प्रतिनिधि तथा आला अधियकारियो को खुश कर स्वतंत्र प्रभार लेकर मनपा के सार्वजनिक बांधकाम विभाग में अपना एक छात्रा राज्य कायम कर आज तक बरकरार रखाऔर यहाँ की जनता के गाढ़ी कमाई पर लगातार विकास के नाम पर लूट होती रही।
इस खेल में यहाँ "आयुक्त" कोई भी आये , "स्थानीय नेता" हो या "विपक्षी " या "मुख्यमंत्री" वह "ईमानदार" हो या "बेईमान" , "चरित्रहीन हो चरित्रवान" यहाँ चलती तो इस "ठेका अधिकारी" की है।
उस ठेका अधिकारी का नाम जाना पहचाना सा है श्री दीपक खांबीत(कार्यकारी अभियंता मनपा )
यह एक ऐसा नाम है इनके बिना मिरा भायंदर महानगर पालिका में एक पत्ता भी नहीं हिल सकता है।
श्री दीपक खंबीत जी का विभाग है सार्वजानिक बांधकाम विभाग (PWD) इस विभाग के अंतर्गत शहर में नित्य नए कामो का प्रस्ताव महासभा में लाना , उस प्रस्ताव को अमल में लाने हेतु क़ानूनी प्रकिर्या आयुक्त से तांत्रिक मंजूरी सह अनुमति लेना , उस कामो हेतु शाषण द्वारा तय नियमो का पालन करना , कामो का ठेका / निविदा निकलवाना , उप अभियंता के माध्यम से कनिष्ठ अभियंताओं द्वारा उनकी देख रेख में कार्य हो करवाना काम समाप्ती त्रिय पक्षीय जांच करवाना , काम समाप्ति पर ईमानदारी से कंप्लीशन सर्टिफिकेट देकर प्रथम देयक और द्वितीय या अन्य देयक देकर फूल और फाइनल पेमेंट ठेकेदार को दिलवाना। इस बीच कोई "ईमानदार" आयुक्त यदि ज्यादा "टांग अड़ाता" है तो अपने राजनैतिक पहचान से जल्द से जल्द उसका तबादला करवाना आदि। .....
आज तक मिरा भायंदर महानगर पालिका में आये मनपा आयुक्त की लिस्ट।
हँगे :अतिवृष्टीच्या काळात मीरा-भाइंदरच्या महापौरांनी पाच वेळा मोबाइलवर संपर्क साधला असतानाही हांगे यांनी महापौरांचा फोन घेतला नाही. त्यामुळे नाराज झालेल्या महापौरांनी हांगे यांची थेट मुख्यमंत्र्यांकडेच तक्रार केली होती. त्यामुळे त्यांची दीड वर्षांपूर्वी तडकाफडकी उचलबांगडी करण्यात आली होती. गेले वर्षभर ते पदस्थापनेच्या प्रतीक्षेत होते. अखेर, एक जुलै रोजी त्यांची पिंपरी महापालिकेत वर्णी लागली होती.
8)SHREE AACHUT HANGE
श्री गीते को महंगा पड़ा मेहता से लेना पंगा।
10) SHREE B.G.PAWAR
SHREE KHATGOANKAR क्या अब यहाँ वर्तमान तैनात ११वे आयुक्त श्री बालाजी खतगांवकर को भी श्री दीपक खंबित कार्यकारी अभियंता के पहुंच का अंदाजा हो चूका होगा वर्ना कभी भी ११ आयुक्तो कि तरह इस महानगर पालिका से जी.पी.एल. मिल सकता है। श्री आयुक्त साहब आप भी भविष्य को देख सावधान रहे। ......
किसी भी आयुक्त को दीपक खंबित के खेल में आडी बाजी कि उसका खेल समाप्त कर जो जिसको जो करना है ऊपर से निचे तक सभी को खरीद कर अपने खीसे में रखा है इस अभियंता ने करोडो अरबो का साम्राज्य समाज सेवा कर के नहीं बनाया है , सीबीआई ,आईबी ,इनकम टैक्स ,लोकायुक्त ,सुचना आयुक्त ,तथा मुख्यमंत्री सभी है इसके मुट्ठी में।
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कैसे होता है यहाँ खंबित का खेल । ..........
१) अपने प्रिय कनिष्ठ अभियंता के मातहत विविध मुद्दों पर जन समस्या के निजात दिलाने के लिए शहर के विकास हेतु विविध कामो का प्रस्ताव उप अभियता के माधयम से अपने पास मंगवाकर आगे (शहर अभियंता) "शिवाजी बारकुंड" के (जो सिर्फ रबर स्टैम्प है ) माध्यम से "आयुक्त" से आर्थिक मंजूरी लेकर मनपा ठराव में अपने राजनैतिक पकड़ द्वारा उस काम का मंजूरी लेना।
२ ) इनको पहले से ही इस सभी कनूनी प्रक्रिया का स्टेप बाय स्टेप की जानकारी होने के कारण कई ऐसी कंपनिया जो इस काम को करती या कर सकती है उनके साथ उस कंपनी में स्लीपिंग पार्टनर के रूप में अपनी हिस्सेदारी तय कर एसी जटिल प्रक्रिया उस निविदा के TERM & CONDITION में डालना भगवान भी चाहकर यह ठेका नहीं ले सकता है। उदा। .......
अ) वह कंपनी किसी "महानगर पालिका" में इतने सालो का काम का अनुभव हों अनिवार्य रहेगा।
ब ) वह कंपनी का अपनी कम्पनी को देखते हुए इतने साल का टर्न ओवर अनिवार्य रहेगा ।
क) वह कंपनी का मालक मीरा रोड का निवासी हो फलाना ढिमका। ......इत्यादि और अपनी ही ऐसी तीन से चार कम्पनी द्वारा ५%से १५ % काम ज्यादा रेट डालकर अपनी ही कम्पनी को सदा यह काम देना।
३) स्टैंडिंग कमेटी में सत्ताधारी पक्ष के ही लोग इस काम हेतु फाइनल मंजूरी हेतु रहते है उनसे निविदा /टेंडर पर कम-ज्यादा % दिखा कर काम देने हेतु मान्यता का लेना।
४ ) खुद ही ऐसा कानून बनाकर आयुक्त से मंजूरी लेना जैसा ५०,०००००/- तक किसी काम का त्रिपकछिय जांच की आवश्यकता नहीं है।
५) मनपा के पैनल पर सार्वजनिक बांधकाम विभाग द्वारा / स्वय द्वारा पहले से तय कर ऐसी कम्पनीओ को त्रिपक्षीय जाँच करवाना अनिवार्य है को नियुक्त करना। (तीन चार ऐसे ही कंपनी में इनकी हिस्सेदारी है )
६) अपने कनिष्ठ अभियंताओं के मातहत अपने मनचाहे हिसाब से फिल्ड बुक /एम.बी.) भरवाना।
७) खुद ही कंप्लीशन सर्टिफिकेट प्रदान करना। ...........
८) कोई भी इनके किसी कार्यो कि खामियों की शिकायत करता है तो स्वय इतने ईमानदारी से आयुक्त हो या कोई अन्य अधिकारी उससे उस शिकायत पर इतने शालीनता से जबाब लिखकर देना जिससे उस विभाग के अधिकारी को बचाना अथार्त अपने "काले कारनामो कि रक्षा करना।"
एक ही पद पर बने रहने कि शिकायत :
हमने मुख्यमंत्री महाराष्ट्र शाषण को "महारष्ट्र दिरंगाई कायदा २००५" जो महाराष्ट्र में नियमतः लागू है
इस विषय पर एक शिकायत की थीइस में हमने यहाँ सालो से भरष्टचार कर रहे अधिकारी को इस कायदा के तहत हटाने की मांग की थी। यह नियम यह बोलता है कि "राज्य में भरष्टचार को रोकने के लिए , भ्रस्टाचार की जड़ो को कमजोर करने हेतु सरकारी कर्मचारी को हर तीन साल में किसी दूसरे पद पर हटाना अनिवार्य है" और हमने मनपा में अपनी जड़े जमा चुके अधिकारियो की लिस्ट प्रशासन को सौपी थी जो हमें पूर्व में सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त हुयी थी। इसकी जांच करने हेतु यह पत्र मनपा आयुक्त मिराभायन्दर के पास आयी थी परन्तु मनपा आयुक्त
कार्यालय में इनके (श्री दीपक खंबित ) के "गुर्गे" पहलेसे ही बिठाये रखे है यह शिकायती पत्र खंबित के पास पंहुचा दिए। खंबित द्वारा इस पर जबाब देखकर आप को भी आश्चर्य होगा इन्होने बड़ी शालीनता से इसका यह जबाब यह कहकर दिया कि "मनपा अस्थापना विभाग द्वारा अधिकारिओ की बदली की जाती है और यह नियम तह सही है।" या फिर जयादा दबाव कोई आयुक्त या प्रशासन द्वारा दिया जाता भी है तो कुछ दिनों हेतु उस अधिकारी / कर्मचारी को कुछ दिनों हेतु किसी दूसरे विभाग में कुछ दिनों के लिए रख दिया जाता है पुनः वापस बुला लिया जाता है।
आयुक्त के आदेश की धज्जिया :
श्री दीपक खंबित के कनिष्ठ अभियंता (विध्युत विभाग ) "प्रशांत जानकर" को "महारष्ट्र राज्य भरष्टचार निरोधक दस्ता ( ठाणे यूनिट )" ने ठेकेदार से बिल पास करवाने के नाम पर रिश्वत लेते रंगे हाथो पकड़ा था तब इसकी नवघर पोलिस ठाणे (भायंदर ) में "एफआई आर क्रमांक २११४/२०११ दर्ज हुआ था ।"
तब के "तत्कालीन आयुक्त श्री विक्रम कुमार साहब (आईएएस)" ने कार्यालीन पत्र निकाल कर यह आदेश दिया था भरष्टचार में दोशी अधिकारी को अकार्यकारी पद पर रखा जाना चाहिए। पत्र क्रमांक मनपा /अस्था/१२७१/२०११-१२ दिनक २०/१२/२०११ के मध्यम से "श्री जानकर को निलंबन" किया गया। तब प्रशांत जानकर को निलंबन के बाद महा सभा ठराव कमांक ३४ दिनाक १५/१/२०१३ के बाद निलंबन आढावा समिति में शिफारिस २०/२/२०१४ को आदेश क्रमांक मनपा /आस्था /१४५/२०४ /२०१४-१५ दिनाक २०/५/२०१४ नुसार से "घन कचरा व्यस्थापन" विभाग में "अकार्यकारी अभियंता" के पद पर माननीय न्यायलय के चल रहे प्रकरण पर निकाल आने तक तैनात किया गया यह आदेश उपायुक्त (मु ) अस्थापना विभाग ने दिया। पुनः २०१५ में बिना किसी सादर व शासकीय अनुमति में मनपा प्रशासनिक विभाग में किसी सक्षम अधिकारी में अनुमती के बिना मनपा प्रशासन विभाग ने जा क`मनपा /सा प्र वि /३७९ /२०१५ दिनक २५/५/२०१५ के माधयम से श्री प्रशांत प्रकाश जानकर को "घनकचरा व्यवस्थापन" से "सार्वजानिक बांधकाम" विभाग में लाभ के पद पर अकार्यकारी से कार्यकारी कनिष्ठ अभियंता ( विधुत विभाग ) में अपने गुरु दीपक खाम्बीत की सेवा हेतु बदली करवा दिया गया। जब हमने २५/५/२०१५ के आदेश को लेकर सादर या अन्य पत्र व्यव्हार को लेकर जिससे अकार्यकारी पद से किसके आधार पर लाभ के पद पर कार्यकारी पद पर कार्यकारी अभियंता बनाया गया या यह आदेश दिया गया उसकी प्रति सुचना अधिकार २००५ के तहत मांगी परन्तु महानगर पालिका का "सामान्य प्रशासन" विभाग देने में अपनी असहमति जताई। जिसकी हमने राज्य सुचना आयोग में शिकायत की है। कुछ वहा के कर्मचरियो ने नाम न बताने की शर्त पर कहा है कि "तिवारीजी आप जानते है जो आप मांग रहे है वह दस्तावेज ही इस कार्यालय में नहीं है यह सब "किसी खास अधिकारी" के कहने पर किसी को लाभ पहुंचने हेतु किया गया है , हमारा इसमें कोई दोष नहीं है। "
यहाँ आकर फिर जानकर और दीपक खंबित ने किया अपने ईमानको कलंकित।
इसी सबा विभाग में विध्युत विभाग के कनिष्ठअभ्यंता द्वारा
निर्मल एम् एम् आर अभियान के तहत मीरा भायंदर में १२० शोचालय में साफ सफाई हेतु लगाये गए प्रेशर पम्प का इस्टीमेट ८६36८८6 /- का कैसे ७० पम्प लगाकर संपूर्ण एस्टीमेट का पैसा व ३०० से ऊपर हाई प्रेशर नोजल के नाम पर शेखर इलेटिकल्स के माधयम से चपत कर दिया गया। यह जानकारी हमने सूचना अधिकार का उपयोग कर इन विभागों से निकल कर इनको समाज से सामने लेकर नग्गा किया।इसकी शिकायत हमने महाराष्ट्र के आला अधिकारी से लिखित , न्यूज में माध्यम से , यूट्यूब में माध्यम से , ईमेल के माधयम इस मिली भगत से हुए भरष्टाचार की जाँच कर दोषी अधिकारिओ पर कार्यवाही व सम्बंधित शेखर इलैक्ट्रिकल्स को बलैक लिस्टेड करने की मांग की.

हमने पुनः सुचना अधिकार २००५ के तहत दूसरा आवेदन किया जिसमे मुख्या बिंदु इस प्रकार थे।
१) जब आपने ७० पंप ही लगाए तो एस्टिमेट में तहत १२० पंप और साहित्य का कुल पैसा कैसे निकला?
२) पंप चोरी हुए तब आप को यह जानकारी किस माध्यम से मिली ?
३) चोरी हुयी घटना की आपने सम्बंधित पुलिस तहने में एफआईआर की हो तो उसकी प्रत दे।
४) यह चोरी की एफआईआर हमारे आप पर लगाए गए आरोप के पहले की है या बाद की ?
५)चोरी की घटना की आपने अपने वरिष्ठ अधिकारिओ को किस माध्यम से जानकारी दी उसकी प्रति प्रदान कराये। लगभग ६ माह से इस विषय में श्री दीपक खंबित व प्रशांत जानकर द्वारा कोई दस्तावेज उपलबध नहीं कराया गया। इस विषय पर हमारे दवरा महाराष्ट्र लोक आयुक्त में शिकायत की गयी है तथा शोषण द्वारा अन्य एजेंसी द्वारा इसकी जाँच की जा रही है।

हमारे बलॉगर पर इस सम्बन्ध में किया गया पोस्ट की लिस्ट।
https://rtiactivistsantoshtiwari.blogspot.com/2019/07/blog-post_43.html
८) कोई भी इनके किसी कार्यो कि खामियों की शिकायत करता है तो स्वय इतने ईमानदारी से आयुक्त हो या कोई अन्य अधिकारी उससे उस शिकायत पर इतने शालीनता से जबाब लिखकर देना जिससे उस विभाग के अधिकारी को बचाना अथार्त अपने "काले कारनामो कि रक्षा करना।"
एक ही पद पर बने रहने कि शिकायत :
इस विषय पर एक शिकायत की थीइस में हमने यहाँ सालो से भरष्टचार कर रहे अधिकारी को इस कायदा के तहत हटाने की मांग की थी। यह नियम यह बोलता है कि "राज्य में भरष्टचार को रोकने के लिए , भ्रस्टाचार की जड़ो को कमजोर करने हेतु सरकारी कर्मचारी को हर तीन साल में किसी दूसरे पद पर हटाना अनिवार्य है" और हमने मनपा में अपनी जड़े जमा चुके अधिकारियो की लिस्ट प्रशासन को सौपी थी जो हमें पूर्व में सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त हुयी थी। इसकी जांच करने हेतु यह पत्र मनपा आयुक्त मिराभायन्दर के पास आयी थी परन्तु मनपा आयुक्त
कार्यालय में इनके (श्री दीपक खंबित ) के "गुर्गे" पहलेसे ही बिठाये रखे है यह शिकायती पत्र खंबित के पास पंहुचा दिए। खंबित द्वारा इस पर जबाब देखकर आप को भी आश्चर्य होगा इन्होने बड़ी शालीनता से इसका यह जबाब यह कहकर दिया कि "मनपा अस्थापना विभाग द्वारा अधिकारिओ की बदली की जाती है और यह नियम तह सही है।" या फिर जयादा दबाव कोई आयुक्त या प्रशासन द्वारा दिया जाता भी है तो कुछ दिनों हेतु उस अधिकारी / कर्मचारी को कुछ दिनों हेतु किसी दूसरे विभाग में कुछ दिनों के लिए रख दिया जाता है पुनः वापस बुला लिया जाता है।आयुक्त के आदेश की धज्जिया :
श्री दीपक खंबित के कनिष्ठ अभियंता (विध्युत विभाग ) "प्रशांत जानकर" को "महारष्ट्र राज्य भरष्टचार निरोधक दस्ता ( ठाणे यूनिट )" ने ठेकेदार से बिल पास करवाने के नाम पर रिश्वत लेते रंगे हाथो पकड़ा था तब इसकी नवघर पोलिस ठाणे (भायंदर ) में "एफआई आर क्रमांक २११४/२०११ दर्ज हुआ था ।"
तब के "तत्कालीन आयुक्त श्री विक्रम कुमार साहब (आईएएस)" ने कार्यालीन पत्र निकाल कर यह आदेश दिया था भरष्टचार में दोशी अधिकारी को अकार्यकारी पद पर रखा जाना चाहिए। पत्र क्रमांक मनपा /अस्था/१२७१/२०११-१२ दिनक २०/१२/२०११ के मध्यम से "श्री जानकर को निलंबन" किया गया। तब प्रशांत जानकर को निलंबन के बाद महा सभा ठराव कमांक ३४ दिनाक १५/१/२०१३ के बाद निलंबन आढावा समिति में शिफारिस २०/२/२०१४ को आदेश क्रमांक मनपा /आस्था /१४५/२०४ /२०१४-१५ दिनाक २०/५/२०१४ नुसार से "घन कचरा व्यस्थापन" विभाग में "अकार्यकारी अभियंता" के पद पर माननीय न्यायलय के चल रहे प्रकरण पर निकाल आने तक तैनात किया गया यह आदेश उपायुक्त (मु ) अस्थापना विभाग ने दिया। पुनः २०१५ में बिना किसी सादर व शासकीय अनुमति में मनपा प्रशासनिक विभाग में किसी सक्षम अधिकारी में अनुमती के बिना मनपा प्रशासन विभाग ने जा क`मनपा /सा प्र वि /३७९ /२०१५ दिनक २५/५/२०१५ के माधयम से श्री प्रशांत प्रकाश जानकर को "घनकचरा व्यवस्थापन" से "सार्वजानिक बांधकाम" विभाग में लाभ के पद पर अकार्यकारी से कार्यकारी कनिष्ठ अभियंता ( विधुत विभाग ) में अपने गुरु दीपक खाम्बीत की सेवा हेतु बदली करवा दिया गया। जब हमने २५/५/२०१५ के आदेश को लेकर सादर या अन्य पत्र व्यव्हार को लेकर जिससे अकार्यकारी पद से किसके आधार पर लाभ के पद पर कार्यकारी पद पर कार्यकारी अभियंता बनाया गया या यह आदेश दिया गया उसकी प्रति सुचना अधिकार २००५ के तहत मांगी परन्तु महानगर पालिका का "सामान्य प्रशासन" विभाग देने में अपनी असहमति जताई। जिसकी हमने राज्य सुचना आयोग में शिकायत की है। कुछ वहा के कर्मचरियो ने नाम न बताने की शर्त पर कहा है कि "तिवारीजी आप जानते है जो आप मांग रहे है वह दस्तावेज ही इस कार्यालय में नहीं है यह सब "किसी खास अधिकारी" के कहने पर किसी को लाभ पहुंचने हेतु किया गया है , हमारा इसमें कोई दोष नहीं है। "
यहाँ आकर फिर जानकर और दीपक खंबित ने किया अपने ईमानको कलंकित।
इसी सबा विभाग में विध्युत विभाग के कनिष्ठअभ्यंता द्वारा
निर्मल एम् एम् आर अभियान के तहत मीरा भायंदर में १२० शोचालय में साफ सफाई हेतु लगाये गए प्रेशर पम्प का इस्टीमेट ८६36८८6 /- का कैसे ७० पम्प लगाकर संपूर्ण एस्टीमेट का पैसा व ३०० से ऊपर हाई प्रेशर नोजल के नाम पर शेखर इलेटिकल्स के माधयम से चपत कर दिया गया। यह जानकारी हमने सूचना अधिकार का उपयोग कर इन विभागों से निकल कर इनको समाज से सामने लेकर नग्गा किया।इसकी शिकायत हमने महाराष्ट्र के आला अधिकारी से लिखित , न्यूज में माध्यम से , यूट्यूब में माध्यम से , ईमेल के माधयम इस मिली भगत से हुए भरष्टाचार की जाँच कर दोषी अधिकारिओ पर कार्यवाही व सम्बंधित शेखर इलैक्ट्रिकल्स को बलैक लिस्टेड करने की मांग की.
जिसकी जाँच हेतु मनपा आयुक्त मिरा भायंदर महानगरपालिका के पास पहुंचने से पहले ही श्री दीपक खंबित ने कनिष्ठ अभियंता प्रशांत जानकर को क्लीन चिट यह कह कर दे दी की यहाँ सिर्फ ७० पम्प ही लगाए गए थे जिसमे १० वाटर पम्प चोरी हो गए।
१) जब आपने ७० पंप ही लगाए तो एस्टिमेट में तहत १२० पंप और साहित्य का कुल पैसा कैसे निकला?
२) पंप चोरी हुए तब आप को यह जानकारी किस माध्यम से मिली ?
३) चोरी हुयी घटना की आपने सम्बंधित पुलिस तहने में एफआईआर की हो तो उसकी प्रत दे।
४) यह चोरी की एफआईआर हमारे आप पर लगाए गए आरोप के पहले की है या बाद की ?
५)चोरी की घटना की आपने अपने वरिष्ठ अधिकारिओ को किस माध्यम से जानकारी दी उसकी प्रति प्रदान कराये। लगभग ६ माह से इस विषय में श्री दीपक खंबित व प्रशांत जानकर द्वारा कोई दस्तावेज उपलबध नहीं कराया गया। इस विषय पर हमारे दवरा महाराष्ट्र लोक आयुक्त में शिकायत की गयी है तथा शोषण द्वारा अन्य एजेंसी द्वारा इसकी जाँच की जा रही है।

हमारे बलॉगर पर इस सम्बन्ध में किया गया पोस्ट की लिस्ट।
https://rtiactivistsantoshtiwari.blogspot.com/2019/07/blog-post_43.html
यूट्यूब पर निर्मल एम् एम् आर घोटाले का सहविस्तार विडिओ विस्तृत जानकारी देखने व समझने के लिए इस लिंक पर देखे।
https://www.youtube.com/watch?v=qJlUFY_w_H8
https://www.youtube.com/watch?v=qJlUFY_w_H8
सोलार घोटाला : (मिरिकल्स इलेक्रिकल्स सोलुशन प्रा लि ० )

फिर हमने किस तरह श्री जानकर व दीपक खंबीत द्वारा सोलर घोटाला का खुलासा किया जिसमे लागत मूल्यों से भी ज्यादा का इस्टीमेट बनाकर और वार्षिक देखभाल के नाम पर मिरिकल इलेक्रिकल्स सोलुशन इंडिया प्रा लि ० के नाम पर हजारो रुपयों का हेरफेर किया गया है।
https://rtiactivistsantoshtiwari.blogspot.com/2019/08/blog-post.html
ट्रैफिक सिग्नल घोटाला ( यूटिलिटी इंटरप्राइजेश )
इसी क्रम में एक नयी कड़ी जुडी है जिसकी मई सह विस्तार चर्चा करना चाह कर भी नहीं कर सकता लिस्ट बहुत लम्बी हो जायेगी। कुछ मुद्दों का खुलासा आज हम यहाँ करेंगे की किस प्रकार
श्री दीपक खंबित के "खभे" पर अटकी है जानकर कि "जान"
चार कंपनियों को ही क्यों मिलता है "हर बार विधुत विभाग का ठेका ?" बहुत बड़ा सवाल है ?
१ ) शेखर इलेकट्रिकल्स २ ) मिरिकल इलेक्रिकल्स सलूशन इंडिया प्रा लि
३ ) न्यू फिल्ड (शेखर इलेक्ट्रिकल्स के मालक शेखर कि पत्नी के नाम पर कंपनी है. ४ ) यूटिलिटी इंटर प्राइजेस
किस प्रकार यह मिलकर "यूटिलिटी इंटरप्राइजेस" से नाम पर ट्रैफिक सिग्नल का घिनौना खेल-खेला गया है।
इस के लिए आप को मनपा /सांबा /कार्य /६२/२०१८-१९ दिनाक १३/७/२०१८ को समझना होगा। इस कार्य आदेश में ३/७/२०१८ से लेकर २/६/१९ तक विविध ठिकाणो पर नया सिग्नल यंत्रणा बैठने का काम दिया गया। यहाँ आपको "विविध" का अर्थ समझना अनिवार्य होगा। "विविध" का मतलब अनेक जगह जिसका कोई स्थान निश्चित नहीं है। ...... यह अधिकारी इतने शातीर है इन्हे साल भर पहिले फलाना काम ख़राब होने वाला है इसकी पूर्व सुचना होती है।
महानगर पालिका द्वारा टेंडर क`क्रमांक २४३११८_१ अंतर्गत मिरा भायंदर के महानगर के हद्द में विविध जगहों पर सिग्नल यंत्रणां व सोलर ब्लिंकर बैठाने हेतु निविदा मंगाई गई थी माननीय आयुक्त महोदय से ७/७/२०१७ को आर्थिक मान्यता व ७/१२/२०१७ को स्थाई समिति से शिफारस मजूर कराया गया।
१) १८/३/२०१९ को अमर पैलेस के पास रा.मा. क्र.`८ पर सिग्नल बैठाया। .......मूल्य ६,८३,८०७ /-एम.बी क्रमांक २३७५ पृष्ठ संख्या ६६-६९ काम का १३वा रनिंग देयक १०/३/२०१९ को कम्प्लेशन सर्टिफिकेट प्रदान कराया गया।
२) १५/३/२०१९ को अमर पैलेस के पास रा.मा. क्र.`८ पर सिग्नल बैठाया। .......मूल्य ९ ,१८ ,०१ ७ /-एम.बी क्रमांक २३७३ पृष्ठ संख्या ५६ -५८ काम का १२ वा रनिंग देयक १०/३/२०१९ को कम्प्लेशन सर्टिफिकेट प्रदान कराया गया।
१ व २ मिला कर १६०१८२४ /- का कंप्लीशन शार्टीफिकेट दिया गया। जिसमे मनपा को एस्टीमेट मूल्य से कम ४३७/- रुपये का बचत हुआ।
क्या वहा २०१९ से पहले ट्रैफिक सिग्नल नहीं था ? अगर था तो वह कहाँ गया ?१६०१८२४/- मूल्य का नया सिग्नल बैठने के नाम पर घांधली हुई है।
३) ८/१/२०१९ को निलकमल जंग्शन के पास रा.मा. क्र.`८ पर सिग्नल बैठाया। .......मूल्य ९ ,०२ ,४६४/-एम.बी क्रमांक २३७५पृष्ठ संख्या ५० -५२ काम का ८ वा रनिंग
४) २३/१/२०१९ को निलकमल जंग्शन के पास रा.मा. क्र.`८ पर सिग्नल बैठाया। .......मूल्य ७,७५ ,३२१/-एम.बी क्रमांक २३७५ पृष्ठ संख्या ५६ -५९ काम का १० वा रनिंग देयक २३ /१ /२०१९ को कम्प्लेशन सर्टिफिकेट प्रदान कराया गया। ३ व ४ मिला कर १६,७७,७६५/- खर्च कर कंप्लीशन शार्टीफिकेट दिया गया। जिसमे मनपा को एस्टीमेट मूल्य से २७६ /- रुपये का बचत हुआ। भई ईमानदारी की भी हद हो गयी १६,७७,७६५ /- मूल्य का नया सिग्नल बैठने के नाम पर घांधली हुई है।
५) ०८/०१/२०१९ को कल्पतरु चौक पर सिगनाक बैठाया गया जिसका मूल्य ८,१९,३८८ /-एम बी क्रमांक २३७५/पृष्ठ ५३-५४ काम का ९वा रनिंग देयक
६) २४ /०१/२०१९ को कल्पतरु चौक पर सिगनाक बैठाया गया जिसका मूल्य ७ ,७४ ,४४४ /-एम बी क्रमांक २३७५/पृष्ठ ६० -६३ काम का ११ वा रनिंग देयक अदा किया गया। ५ व ६ मिला कर १५ ,९३ ,७९४ /- खर्च कर कंप्लीशन शार्टीफिकेट दिया गया। जिसमे मनपा को एस्टीमेट मूल्य से ३३१९ /- रुपये का बचत हुआ। भई यहाँ तो ईमानदारी की भी हद हो गयी १५ ,९३,७९४,/- मूल्य का नया सिग्नल बैठाने के नाम पर घांधली हुई है।
७) १/१२/२०१८ को पेनकर पाड़ा प्रभाग क्रमांक १६ में सोलर ब्लिंकर बैठाया गया जिसका मूल्य ८,७७,५७७,/-एम.बी. क्रमांक २३७५ पृष्ठ संख्या १९ से २५ काम का ७वा रनिंग देयक अदा किया गया।
८,७७,५७८ /- खर्च कर कंप्लीशन शार्टीफिकेट दिया गया। जिसमे मनपा को एस्टीमेट मूल्य से १७७५ /- रुपये का बचत हुआ। भई यहाँ तो ईमानदारी की भी हद हो गयी ८,७७,५७८ /- मूल्य का सिग्नल पर नया ब्लिंकर बैठाने के नाम पर घांधली हुई है।
८) ८/१०/२०१८ को छत्रपति शिवजी महाराज मार्ग पर वीर सावरकर चौक के सिग्नल को दुरुस्त करने के नाम पर २,९४,८४९ /-का भुगतान किया गया। जिसका एम बी क्रमांक २३७५ पृष्ठ क्रमांक १ से ३ दुरुस्ती के नाम पर भुगतान किया गया। ८/१०/१८ लो इस काम का कंप्लीशन सार्टिफिकेट प्रदान क़िया गया।
जब नया काम का टेंडर दिया गया थो दुरुस्ती के नाम पर इसी कार्य आदेश में क्यों भुगतान किया गया जब की वार्षिक दुरुस्ती के नाम वार्षिक देखभाल हेतु ठेका प्रति वर्ष किया गया होता है।
९) ८/१०/२०१८ को छत्रपति शिवजी महाराज मार्ग पर सिल्वर पार्क चौक के सिग्नल को दुरुस्त करने के नाम पर ३ ,२७ ,८२८ /-का भुगतान किया गया। जिसका एम बी क्रमांक २३७५ पृष्ठ क्रमांक ४ से ६ दुरुस्ती के नाम पर भुगतान किया गया। ८/१०/१८ लो इस काम का कंप्लीशन सार्टिफिकेट प्रदान क़िया गया।
जब नया काम का टेंडर दिया गया थो दुरुस्ती के नाम पर इसी कार्य आदेश में क्यों भुगतान किया गया जब की वार्षिक दुरुस्ती के नाम वार्षिक देखभाल हेतु ठेका प्रति वर्ष किया गया होता है।
१०) १० /९ /२०१८ को रामक`८ प्रसाद होटल चौक के सिग्नल को दुरुस्त करने के नाम पर १ ,८८ ,९०४ /-का भुगतान किया गया। जिसका एम बी क्रमांक २३७५ पृष्ठ क्रमांक ५३ से ५५ दुरुस्ती के नाम पर तृतीय देयक भुगतान किया गया। १० /९ /१८ को इस काम का कंप्लीशन सार्टिफिकेट प्रदान क़िया गया।
जब नया काम का टेंडर दिया गया थो दुरुस्ती के नाम पर इसी कार्य आदेश में क्यों भुगतान किया गया जब की वार्षिक दुरुस्ती के नाम वार्षिक देखभाल हेतु ठेका प्रति वर्ष किया गया होता है।
११) १० /९ /२०१८ को रामक`८ वर्सोवा जंगशन के सिग्नल को स्तान्तरित करने के नाम पर ३,५०,६७८/-का भुगतान किया गया। जिसका एम बी क्रमांक २२८२ पृष्ठ क्रमांक ४७ से ५० स्तान्तरित के नाम पर तृतीय देयक भुगतान किया गया। १० /९ /१८ को इस काम का कंप्लीशन सार्टिफिकेट प्रदान क़िया गया।
१२) १० /९ /२०१८ को रामक`८ काशीमीरा जंगशन के सिग्नल को दुरुस्त करने के नाम पर १ ,७४ ,९००/-का भुगतान किया गया। जिसका एम बी क्रमांक २२८२ पृष्ठ क्रमांक ५१ से ५२ दुरुस्त के नाम पर द्वितीय देयक भुगतान किया गया। १० /९ /१८ को इस काम का कंप्लीशन सार्टिफिकेट प्रदान क़िया गया।
१३) १० /९ /२०१८ को छत्रपति शिवजी मार्ग के दीपक अस्पताल जंगशन के सिग्नल नया यंत्रणा व पोल बैठने के नाम पर ४ ,१० ,२७३ /-का भुगतान किया गया। जिसका एम बी क्रमांक २२८२ पृष्ठ क्रमांक ५६ से ५९ पर चौथा देयक भुगतान किया गया। १० /९ /१८ को इस काम का कंप्लीशन सार्टिफिकेट प्रदान क़िया गया।
क्या दीपक अस्पताल सिग्नल पर पहले यंत्रणा नहीं थी ? क्या पहले यहाँ सिग्नल थी तो पुनः इस को क्यों बैठाया गया पुराना पोल कहा है ?
सिर्फ यहाँ काका को चाचा ,चाचा को काका कह लोगो के टेक्स के पैसो से साथ मिलकर खुल कर लुटा गया है।
इसी प्रकार यूटिलिटी इंटरप्रजेस को वार्षिक सिंग्नल वार्षिक देखरेख व दुरुस्ती के लिए मनपा /संबा /कार्या /९६/१८-१९ दिनक १/८/१९ को २५,८५,०००/- टेंडर आईडी क्रमांक २५१३१७_१ के माध्यम से मनपा हद्द में गोल्डन नेस्ट , दीपक अस्पताल , शिवर गार्डन ,कनकिया ,एस के स्टोन , सिल्वर पार्क , प्लेजेंट पार्क , पूनम सागर ,रसाज जंगसन , सेक्टर ११ , मैक्सस मॉल के सिग्नलों को वार्षिक देखभाल व दुरुस्त करने हेतु काम दिया गया। जिसमे यह सभी विद्युत /सार्व ईमारत/जनरेटर दुरुस्ती लेखा शीर्ष का फण्ड विशेष महासभा के अनुमति दी गयी कारन आप समझ गए होंगे। जिसमे २ बार ९,९९,१८८, व ९,९२,७८६/- का भुगतान एमबी क्रमांक २३७५ पृष्ठ संख्या ७६ से ७९ दिनाक १९/३/१९ व ११/१०/१८ को इसका भुगतान कराया गया।
मनपा /संबा /कार्या /४४/१७-१८ दिनाक १६/५/२०१८ मनपा छेत्र में पंडित भीमसेन अस्पताल में लिफ्ट की वार्षिक देखभाल हेतु २,७५ ,००० /- काम दिया गया। व मनपा /सांबा /कार्या /६४/२०१८-१९ दिनाक ०३/०७/२०१८ इसी कंपनी के माध्यम से मुख्य कार्यालय सार्व इमारती नगरभवन , विविध स्कुल ,प्रभाग कार्यालय उद्द्यान इत्यादि स्तनों पर पानी शुद्धिकरण मशीन की वार्षिक देखभाल के नाम पैर ६,०००००/- का काम दिया गया। ३/७/१८ से २/९/१८ तक का दिया गया।
तथा मीरा रोड में विविध जगहों पर सोलर लाईट ब्लिंकर क़े वार्षिक देखभाल व दुरुस्ती के नाम पर ५,५०,०००/- का मनपा /संबा /कार्या /६५/२०१८-१९ दिनांक ०३/०७/२०१८ को यह काम का कार्यादेश दिया गया।
महानगर पालिका जब जब कंप्लीशन सार्टिफिकेट किसी ठेकेदार को दिया गया है उसमे काम समाप्ती की तारीख व आगे आने वाले तीन सालो तक कोई भी त्रुटि या खराबी आने पर मुफ्त में रिपेयर व तीन सालो तक उसका मुफ्त में रिपेयर करने की जबाबदारी उस कंपनी की होती ये लिखा होता भी फिर भी मररमत के नाम पर लाखो रूपये के न्यारे व्यारे नए मूल्यों ज्यादा का मररमत के नाम पर यह सिर्फ कागजो में कर डालते है. ऐसे अनेको काम इस कंपनी को दिए गए है जो सिर्फ कागजो में सिमट कर रह गए है जहा जमीं पर उतरे है वहा बड़ी संख्या में मूल्यों से साथ व क्वालिटी से साथ समझौता हुआ है जिसक सीधा सीधा फायदा दीपक खंबित और प्रशांत जानकर को पंहुचा है।
१) सार्वजानिक बांधकाम में इनकी ही कंपनी?
२ ) विध्युत विभाग में इनकी ही कंपनी ?
३) गार्डन विभाग में इनकी ही कम्पनी ?
४) सुरक्षा एजेंसी में भी इनकी ही कंपनी ?
५ ) घन कचरा व्यवस्थापन में इनकी ही कंपनी ?
६) पानी विभाग में इनकी ही कम्पनी ?
७) सड़क बनाने में भी इनकी ही कम्पनी ?
८ ) त्रिपक्षीय जाँच में इनकी ही कम्पनी ?
९ ) ओसी देने के नाम पर विध्युत विभाग (साबा) द्वारा सोलर वाटर हीटर हेतु एक हस्ताक्षर की क़ीमत ५०,०००/- से ८०,०००/- हो चूका है।
नाम कहो तो यह भी बता दे कि किस किस कम्पनी के साथ इनका साथ गाठ है या जांच एजेंसी के लिए भी हम कुछ कार्य छोड़े देते है।
अब और कितना जनता को लुटोगे साहब ?
मेरा सवाल ?
क्या इस भारत देश को अंग्रेजो कि तर्ज पर नौकरशाह (काले अंग्रेज ) जनता कि गाढ़े खून पसीने की कमाई को लूटकर अपना घर भरते रहेंगे और जनता अपने आप को इनके हाथो में लुटती हुए मूक दर्शक बन कर देखती रहेगी ?
क्या अब भी भारत देश व महारष्ट्रा की जाँच एजेंसी सीबीआई ,आयकर विभाग ,आईबी ,आय से ज्यादा की संपत्ति लगभग २००० हजार से ज्यादा की चल अचल तथा अनेको कम्पनी खोल कर जनता लूटने वाले इस अधिकारी की जांच करेगी ?
कहा गये ५६" का सीना वाले हमारे प्रधानमंत्री , वित्तमंत्री और ईमानदार महारष्ट्र के मुख्यमंत्री जी श्री देवेन्द्र फडणवीस जी व लोकायुक्त ?
क्या आप को भी आप का हिस्सा मिल चूका है ?
है किसी माँ के लाल में इतनी हिम्मत जो इन के द्वारा किये गए सभी कार्यो की जाँच कर सके ?
संतोष कुमार तिवारी
सुचना अधिकार कार्यकर्ता
तथा समाज सेवक
९८२०२२८६२१/९४७३७३४४८७
(अधिक जानकारी और दस्तावेज साक्ष्य के लिए आप ऊपर दिए गए नम्बरो पर संपर्क कर सकते है।)
इस पोस्ट को इतना ज्यादा से ज्यादा शेयर करे की यह खबर भारत सरकार व महाराष्ट्र सरकार तथा जन जन तक मेरी आवाज पहुंच जाय।
धन्यवाद्
ट्रैफिक सिग्नल घोटाला ( यूटिलिटी इंटरप्राइजेश )
इसी क्रम में एक नयी कड़ी जुडी है जिसकी मई सह विस्तार चर्चा करना चाह कर भी नहीं कर सकता लिस्ट बहुत लम्बी हो जायेगी। कुछ मुद्दों का खुलासा आज हम यहाँ करेंगे की किस प्रकार
श्री दीपक खंबित के "खभे" पर अटकी है जानकर कि "जान"
चार कंपनियों को ही क्यों मिलता है "हर बार विधुत विभाग का ठेका ?" बहुत बड़ा सवाल है ?
१ ) शेखर इलेकट्रिकल्स २ ) मिरिकल इलेक्रिकल्स सलूशन इंडिया प्रा लि
३ ) न्यू फिल्ड (शेखर इलेक्ट्रिकल्स के मालक शेखर कि पत्नी के नाम पर कंपनी है. ४ ) यूटिलिटी इंटर प्राइजेस
किस प्रकार यह मिलकर "यूटिलिटी इंटरप्राइजेस" से नाम पर ट्रैफिक सिग्नल का घिनौना खेल-खेला गया है।
इस के लिए आप को मनपा /सांबा /कार्य /६२/२०१८-१९ दिनाक १३/७/२०१८ को समझना होगा। इस कार्य आदेश में ३/७/२०१८ से लेकर २/६/१९ तक विविध ठिकाणो पर नया सिग्नल यंत्रणा बैठने का काम दिया गया। यहाँ आपको "विविध" का अर्थ समझना अनिवार्य होगा। "विविध" का मतलब अनेक जगह जिसका कोई स्थान निश्चित नहीं है। ...... यह अधिकारी इतने शातीर है इन्हे साल भर पहिले फलाना काम ख़राब होने वाला है इसकी पूर्व सुचना होती है।
महानगर पालिका द्वारा टेंडर क`क्रमांक २४३११८_१ अंतर्गत मिरा भायंदर के महानगर के हद्द में विविध जगहों पर सिग्नल यंत्रणां व सोलर ब्लिंकर बैठाने हेतु निविदा मंगाई गई थी माननीय आयुक्त महोदय से ७/७/२०१७ को आर्थिक मान्यता व ७/१२/२०१७ को स्थाई समिति से शिफारस मजूर कराया गया।
१) १८/३/२०१९ को अमर पैलेस के पास रा.मा. क्र.`८ पर सिग्नल बैठाया। .......मूल्य ६,८३,८०७ /-एम.बी क्रमांक २३७५ पृष्ठ संख्या ६६-६९ काम का १३वा रनिंग देयक १०/३/२०१९ को कम्प्लेशन सर्टिफिकेट प्रदान कराया गया।
२) १५/३/२०१९ को अमर पैलेस के पास रा.मा. क्र.`८ पर सिग्नल बैठाया। .......मूल्य ९ ,१८ ,०१ ७ /-एम.बी क्रमांक २३७३ पृष्ठ संख्या ५६ -५८ काम का १२ वा रनिंग देयक १०/३/२०१९ को कम्प्लेशन सर्टिफिकेट प्रदान कराया गया।
१ व २ मिला कर १६०१८२४ /- का कंप्लीशन शार्टीफिकेट दिया गया। जिसमे मनपा को एस्टीमेट मूल्य से कम ४३७/- रुपये का बचत हुआ।
क्या वहा २०१९ से पहले ट्रैफिक सिग्नल नहीं था ? अगर था तो वह कहाँ गया ?१६०१८२४/- मूल्य का नया सिग्नल बैठने के नाम पर घांधली हुई है।
३) ८/१/२०१९ को निलकमल जंग्शन के पास रा.मा. क्र.`८ पर सिग्नल बैठाया। .......मूल्य ९ ,०२ ,४६४/-एम.बी क्रमांक २३७५पृष्ठ संख्या ५० -५२ काम का ८ वा रनिंग
४) २३/१/२०१९ को निलकमल जंग्शन के पास रा.मा. क्र.`८ पर सिग्नल बैठाया। .......मूल्य ७,७५ ,३२१/-एम.बी क्रमांक २३७५ पृष्ठ संख्या ५६ -५९ काम का १० वा रनिंग देयक २३ /१ /२०१९ को कम्प्लेशन सर्टिफिकेट प्रदान कराया गया। ३ व ४ मिला कर १६,७७,७६५/- खर्च कर कंप्लीशन शार्टीफिकेट दिया गया। जिसमे मनपा को एस्टीमेट मूल्य से २७६ /- रुपये का बचत हुआ। भई ईमानदारी की भी हद हो गयी १६,७७,७६५ /- मूल्य का नया सिग्नल बैठने के नाम पर घांधली हुई है।
५) ०८/०१/२०१९ को कल्पतरु चौक पर सिगनाक बैठाया गया जिसका मूल्य ८,१९,३८८ /-एम बी क्रमांक २३७५/पृष्ठ ५३-५४ काम का ९वा रनिंग देयक
६) २४ /०१/२०१९ को कल्पतरु चौक पर सिगनाक बैठाया गया जिसका मूल्य ७ ,७४ ,४४४ /-एम बी क्रमांक २३७५/पृष्ठ ६० -६३ काम का ११ वा रनिंग देयक अदा किया गया। ५ व ६ मिला कर १५ ,९३ ,७९४ /- खर्च कर कंप्लीशन शार्टीफिकेट दिया गया। जिसमे मनपा को एस्टीमेट मूल्य से ३३१९ /- रुपये का बचत हुआ। भई यहाँ तो ईमानदारी की भी हद हो गयी १५ ,९३,७९४,/- मूल्य का नया सिग्नल बैठाने के नाम पर घांधली हुई है।
७) १/१२/२०१८ को पेनकर पाड़ा प्रभाग क्रमांक १६ में सोलर ब्लिंकर बैठाया गया जिसका मूल्य ८,७७,५७७,/-एम.बी. क्रमांक २३७५ पृष्ठ संख्या १९ से २५ काम का ७वा रनिंग देयक अदा किया गया।
८,७७,५७८ /- खर्च कर कंप्लीशन शार्टीफिकेट दिया गया। जिसमे मनपा को एस्टीमेट मूल्य से १७७५ /- रुपये का बचत हुआ। भई यहाँ तो ईमानदारी की भी हद हो गयी ८,७७,५७८ /- मूल्य का सिग्नल पर नया ब्लिंकर बैठाने के नाम पर घांधली हुई है।
८) ८/१०/२०१८ को छत्रपति शिवजी महाराज मार्ग पर वीर सावरकर चौक के सिग्नल को दुरुस्त करने के नाम पर २,९४,८४९ /-का भुगतान किया गया। जिसका एम बी क्रमांक २३७५ पृष्ठ क्रमांक १ से ३ दुरुस्ती के नाम पर भुगतान किया गया। ८/१०/१८ लो इस काम का कंप्लीशन सार्टिफिकेट प्रदान क़िया गया।
जब नया काम का टेंडर दिया गया थो दुरुस्ती के नाम पर इसी कार्य आदेश में क्यों भुगतान किया गया जब की वार्षिक दुरुस्ती के नाम वार्षिक देखभाल हेतु ठेका प्रति वर्ष किया गया होता है।
९) ८/१०/२०१८ को छत्रपति शिवजी महाराज मार्ग पर सिल्वर पार्क चौक के सिग्नल को दुरुस्त करने के नाम पर ३ ,२७ ,८२८ /-का भुगतान किया गया। जिसका एम बी क्रमांक २३७५ पृष्ठ क्रमांक ४ से ६ दुरुस्ती के नाम पर भुगतान किया गया। ८/१०/१८ लो इस काम का कंप्लीशन सार्टिफिकेट प्रदान क़िया गया।
जब नया काम का टेंडर दिया गया थो दुरुस्ती के नाम पर इसी कार्य आदेश में क्यों भुगतान किया गया जब की वार्षिक दुरुस्ती के नाम वार्षिक देखभाल हेतु ठेका प्रति वर्ष किया गया होता है।
१०) १० /९ /२०१८ को रामक`८ प्रसाद होटल चौक के सिग्नल को दुरुस्त करने के नाम पर १ ,८८ ,९०४ /-का भुगतान किया गया। जिसका एम बी क्रमांक २३७५ पृष्ठ क्रमांक ५३ से ५५ दुरुस्ती के नाम पर तृतीय देयक भुगतान किया गया। १० /९ /१८ को इस काम का कंप्लीशन सार्टिफिकेट प्रदान क़िया गया।
जब नया काम का टेंडर दिया गया थो दुरुस्ती के नाम पर इसी कार्य आदेश में क्यों भुगतान किया गया जब की वार्षिक दुरुस्ती के नाम वार्षिक देखभाल हेतु ठेका प्रति वर्ष किया गया होता है।
११) १० /९ /२०१८ को रामक`८ वर्सोवा जंगशन के सिग्नल को स्तान्तरित करने के नाम पर ३,५०,६७८/-का भुगतान किया गया। जिसका एम बी क्रमांक २२८२ पृष्ठ क्रमांक ४७ से ५० स्तान्तरित के नाम पर तृतीय देयक भुगतान किया गया। १० /९ /१८ को इस काम का कंप्लीशन सार्टिफिकेट प्रदान क़िया गया।
१२) १० /९ /२०१८ को रामक`८ काशीमीरा जंगशन के सिग्नल को दुरुस्त करने के नाम पर १ ,७४ ,९००/-का भुगतान किया गया। जिसका एम बी क्रमांक २२८२ पृष्ठ क्रमांक ५१ से ५२ दुरुस्त के नाम पर द्वितीय देयक भुगतान किया गया। १० /९ /१८ को इस काम का कंप्लीशन सार्टिफिकेट प्रदान क़िया गया।
१३) १० /९ /२०१८ को छत्रपति शिवजी मार्ग के दीपक अस्पताल जंगशन के सिग्नल नया यंत्रणा व पोल बैठने के नाम पर ४ ,१० ,२७३ /-का भुगतान किया गया। जिसका एम बी क्रमांक २२८२ पृष्ठ क्रमांक ५६ से ५९ पर चौथा देयक भुगतान किया गया। १० /९ /१८ को इस काम का कंप्लीशन सार्टिफिकेट प्रदान क़िया गया।
क्या दीपक अस्पताल सिग्नल पर पहले यंत्रणा नहीं थी ? क्या पहले यहाँ सिग्नल थी तो पुनः इस को क्यों बैठाया गया पुराना पोल कहा है ?
सिर्फ यहाँ काका को चाचा ,चाचा को काका कह लोगो के टेक्स के पैसो से साथ मिलकर खुल कर लुटा गया है।
इसी प्रकार यूटिलिटी इंटरप्रजेस को वार्षिक सिंग्नल वार्षिक देखरेख व दुरुस्ती के लिए मनपा /संबा /कार्या /९६/१८-१९ दिनक १/८/१९ को २५,८५,०००/- टेंडर आईडी क्रमांक २५१३१७_१ के माध्यम से मनपा हद्द में गोल्डन नेस्ट , दीपक अस्पताल , शिवर गार्डन ,कनकिया ,एस के स्टोन , सिल्वर पार्क , प्लेजेंट पार्क , पूनम सागर ,रसाज जंगसन , सेक्टर ११ , मैक्सस मॉल के सिग्नलों को वार्षिक देखभाल व दुरुस्त करने हेतु काम दिया गया। जिसमे यह सभी विद्युत /सार्व ईमारत/जनरेटर दुरुस्ती लेखा शीर्ष का फण्ड विशेष महासभा के अनुमति दी गयी कारन आप समझ गए होंगे। जिसमे २ बार ९,९९,१८८, व ९,९२,७८६/- का भुगतान एमबी क्रमांक २३७५ पृष्ठ संख्या ७६ से ७९ दिनाक १९/३/१९ व ११/१०/१८ को इसका भुगतान कराया गया।
मनपा /संबा /कार्या /४४/१७-१८ दिनाक १६/५/२०१८ मनपा छेत्र में पंडित भीमसेन अस्पताल में लिफ्ट की वार्षिक देखभाल हेतु २,७५ ,००० /- काम दिया गया। व मनपा /सांबा /कार्या /६४/२०१८-१९ दिनाक ०३/०७/२०१८ इसी कंपनी के माध्यम से मुख्य कार्यालय सार्व इमारती नगरभवन , विविध स्कुल ,प्रभाग कार्यालय उद्द्यान इत्यादि स्तनों पर पानी शुद्धिकरण मशीन की वार्षिक देखभाल के नाम पैर ६,०००००/- का काम दिया गया। ३/७/१८ से २/९/१८ तक का दिया गया।
तथा मीरा रोड में विविध जगहों पर सोलर लाईट ब्लिंकर क़े वार्षिक देखभाल व दुरुस्ती के नाम पर ५,५०,०००/- का मनपा /संबा /कार्या /६५/२०१८-१९ दिनांक ०३/०७/२०१८ को यह काम का कार्यादेश दिया गया।
महानगर पालिका जब जब कंप्लीशन सार्टिफिकेट किसी ठेकेदार को दिया गया है उसमे काम समाप्ती की तारीख व आगे आने वाले तीन सालो तक कोई भी त्रुटि या खराबी आने पर मुफ्त में रिपेयर व तीन सालो तक उसका मुफ्त में रिपेयर करने की जबाबदारी उस कंपनी की होती ये लिखा होता भी फिर भी मररमत के नाम पर लाखो रूपये के न्यारे व्यारे नए मूल्यों ज्यादा का मररमत के नाम पर यह सिर्फ कागजो में कर डालते है. ऐसे अनेको काम इस कंपनी को दिए गए है जो सिर्फ कागजो में सिमट कर रह गए है जहा जमीं पर उतरे है वहा बड़ी संख्या में मूल्यों से साथ व क्वालिटी से साथ समझौता हुआ है जिसक सीधा सीधा फायदा दीपक खंबित और प्रशांत जानकर को पंहुचा है।
१) सार्वजानिक बांधकाम में इनकी ही कंपनी?
२ ) विध्युत विभाग में इनकी ही कंपनी ?
३) गार्डन विभाग में इनकी ही कम्पनी ?
४) सुरक्षा एजेंसी में भी इनकी ही कंपनी ?
५ ) घन कचरा व्यवस्थापन में इनकी ही कंपनी ?
६) पानी विभाग में इनकी ही कम्पनी ?
७) सड़क बनाने में भी इनकी ही कम्पनी ?
८ ) त्रिपक्षीय जाँच में इनकी ही कम्पनी ?
९ ) ओसी देने के नाम पर विध्युत विभाग (साबा) द्वारा सोलर वाटर हीटर हेतु एक हस्ताक्षर की क़ीमत ५०,०००/- से ८०,०००/- हो चूका है।
नाम कहो तो यह भी बता दे कि किस किस कम्पनी के साथ इनका साथ गाठ है या जांच एजेंसी के लिए भी हम कुछ कार्य छोड़े देते है।
अब और कितना जनता को लुटोगे साहब ?
मेरा सवाल ?
क्या इस भारत देश को अंग्रेजो कि तर्ज पर नौकरशाह (काले अंग्रेज ) जनता कि गाढ़े खून पसीने की कमाई को लूटकर अपना घर भरते रहेंगे और जनता अपने आप को इनके हाथो में लुटती हुए मूक दर्शक बन कर देखती रहेगी ?
क्या अब भी भारत देश व महारष्ट्रा की जाँच एजेंसी सीबीआई ,आयकर विभाग ,आईबी ,आय से ज्यादा की संपत्ति लगभग २००० हजार से ज्यादा की चल अचल तथा अनेको कम्पनी खोल कर जनता लूटने वाले इस अधिकारी की जांच करेगी ?
कहा गये ५६" का सीना वाले हमारे प्रधानमंत्री , वित्तमंत्री और ईमानदार महारष्ट्र के मुख्यमंत्री जी श्री देवेन्द्र फडणवीस जी व लोकायुक्त ?
क्या आप को भी आप का हिस्सा मिल चूका है ?
है किसी माँ के लाल में इतनी हिम्मत जो इन के द्वारा किये गए सभी कार्यो की जाँच कर सके ?
संतोष कुमार तिवारी
सुचना अधिकार कार्यकर्ता
तथा समाज सेवक
९८२०२२८६२१/९४७३७३४४८७
(अधिक जानकारी और दस्तावेज साक्ष्य के लिए आप ऊपर दिए गए नम्बरो पर संपर्क कर सकते है।)
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मिरा भायंदर महानगर पालिका मे अवैध मोबाईल टावरो कि भरमार।। महानगर पालिका अधिनियम 1949 का कालम 260 का हवाला देकर प्रभाग अधिकारीयो ने कि जेब भारी। मिरा भायंदर : सुचना अधिकार कार्यकार्ता संतोष कुमार तिवारी ने मिराभायंदर महानगर पालिका मे वर्ष 2016 मे सुचना अधिकार के तहत मनपा श्रेत्र मे लगे अनाधिकृत मोबाईल टावरो कि लिस्ट जो टीआरआई व मा. उच्च्यतम न्यायालय के दिशानिर्देश के विपरीत है मांगी थी। आपको जानकारी हेतु यह जानना अत्यंत आवश्तयक है कि मनपा नगररचना विभाग ने पत्र क्रमांक मनपा/नर 3191/ 16- 17 दिनांक 15/10/2016 को स्वय मनपा उप आयुक्त को पत्र लिखकर शासन के पत्र क्रमांक मिभाम /1316/107 /नवि – 28 दिनांक 17/6/16 व 17 5/16 के पत्र के जबाब मे माना था कि मनपा क्षेत्र मे परवानगी प्राप्त 55 मोबाईल टार्वस तथा मुद्वतवाढ ना लेने के कारण अनाधिकृत 224 व मोवाईल टावर्स का परवानगी सवंधित विभाग के पास अर्ज त्रुटी के कारण नामंजुर 336 हुए है।मनपा इन मोबाईल टावरो मे जो मोबाईल कंपनीया बंद हो चुकि है उन...
भारतरत्न पंडित भीमसेन जोशी "टेम्बा" अस्पतल में चलता है "रामराज्य" प्रशाषन बेखबर , डॉक्टर मालामाल
भारतरत्न पंडित भीमसेन जोशी "टेम्बा" अस्पताल में चलता है "रामराज्य" प्रशासन बेखबर , डॉक्टर मालामाल। रामराज्य का मरीजों को होता है खुला अनुभव : अज्ञानता वश यहाँ मरीज का हो रहा है बुरा हाल। मिरा - भायंदर , ठाणे : अभी हाल में ही मिरा भायंदर मनपा द्वारा संचालित टेम्बा अस्पताल को महाराष्ट्र शाषण ने टेक ओवर किया। यहाँ लगभग १४ लाख से ऊपर की आबादी को पहला सरकारी अस्पताल मिला। फिर भी पहले से रामराज्य का आदत यहाँ के डाक्टरों कि नहीं गयी है। यहाँ कि मनपा पहले से ही विवादों में घिरे रहने तथा भ्रस्टाचार से मनपा का चोली दामन का साथ रहा है। फिर यह आदत इतने जल्दी कैसे जाने वाली है। इस अस्पताल की नींव ही भ्रस्टाचार पर कड़ी है चाहे वह अस्पताल बनवाने का ठेका हो या एम्बुलेंस या फिर अन्य बुनियादी जरूरतों के सामान खरीदना हो यहाँ २३% मूल्य का रकम किसी खास व्यक्ति को चढ़ावा के बिना कोई ठेका नहीं मिल सकता तो फिर वह ठेकेदार कैसे सामान का उपयोग करेगा इसका भगवान ही मालिक है। इसके बाद आयुक्त से लेकर बांधकाम के-अधिकारी से नगर सेवक तक को प्रसाद चढ़ा...
"आचार सहिंता" लगाने से पूर्व मिरा-भायंदर महानगर पालिका द्वारा "करोडो" का प्रस्ताव मिनटों में पास।
वरिष्ठ शिवसेना नगर सेविका व सभापति प्रभाग ४ (मनपा ) श्रीमती तारा घरत महाराष्ट्र : ठाणे,मिरा -भायंदर महानगर पालिका को अपने चुंगल में ले चुके दीपक खंबित ने भाजपा द्वारा शिवसेना को युति के नाम पर घोटा लोकतन्त्र का गला। "खंबित का खेल" ( भाजपा ने युति के नाम पर घोटा लोकतंत्र का गला, किया शिवसेना से विश्वास घात ) महारष्ट्र में शिवसेना भाजपा दोनों मिलकर हमेशा सरकार बनाने के कारण छोटे भाई और बड़े भाई की भूमिका में रहती है। यह विधान सभा में आपसी विरोध के कारण दोनों हो पार्टिया सन २०१४ अगल अलग चुनाव लड़ी। मिरा भायंदर महानगर में एक छत्र राज चलाने वाले "कार्यकारी अभियंता श्री दीपक खंबित "द्वारा हमेशा से ही लुटा जाता रहा है। "आचार सहिता" से पूर्व खेला गया पूर्व नियोजित तरीके से भरस्टाचार का खेल। इस की विस्तृत जानकारी के लिए इस लिंक पर जाये। दीपक खंबित का खेल : https://rtiactivistsantoshtiwari.blogspot.com/ कमेटी के मीटिंग अचानक मीरा भायंदर नगर पालिका में दिनाक ६/सितम्बर २०१९ को ...
अंधेर नगरी चौपट राजा , तु भी खायेजा हम भी खाये। ..(ठेकेदार से मनपा अधिकारिओ की साथ गाठ )
सौर ऊर्जा के नाम पर भ्रस्ट अधिकारिओ का का ला सच प्रेस नोट अंधेर नगरी चौपट राजा , तु भी खायेजा हम भी खायेजा । ......... मिरा भायंदर महानगर पालिका में सौर ऊर्जा घोटाला क्यों है महाराष्ट्र की यह महानगर पालिका कंगाल ???? में मिराक्लस इलेक्ट्रॉनिक्स सोल्युशन इंडिया प्रा लि का क्या है इस खेल में कंनेक्शन ?? वैसे तो मिरा भायंदर महानगर पालिका का सार्वजनिक बांधकाम विभाग संपूर्ण महाराष्ट्र में भ्रस्टाचार के मामले में अव्वल नंबर पर आता है। इसमें आपको कोई अतिसूक्ति नहीं होनी चाहिए। इस खेल के लिए अधिकारी ठेकेदारों के मार्फ़त अपनी आय को दुगना और चार गुना करने में दिनरात प्रयत्नशील रहते है। भरष्टाचार के दो मुख्य चेहरे Mr.Prashant Jankar ( Jr...
भारत में भ्रष्टाचार
भारत में भ्रष्टाचार अंग्रेजों ने भारत के राजा महाराजाओं को भ्रष्ट करके भारत को गुलाम बनाया। उसके बाद उन्होने योजनाबद्ध तरीके से भारत में भ्रष्टाचार को बढावा दिया और भ्रष्टाचार को गुलाम बनाये रखने के प्रभावी हथियार की तरह इस्तेमाल किया। देश में भ्रष्टाचार भले ही वर्तमान में सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है, लेकिन भ्रष्टाचार ब्रिटिश शासनकाल में ही होने लगा था जिसे वे हमारे राजनेताओं को विरासत में देकर गये थे। चर्चा और आन्दोलनों का एक प्रमुख विषय रहा है। आजादी के एक दशक बाद से ही भारत भ्रष्टाचार के दलदल में धंसा नजर आने लगा था और उस समय संसद में इस बात पर बहस भी होती थी। 21 दिसम्बर 1963 को भारत में भ्रष्टाचार के खात्मे पर संसद में हुई बहस में डॉ राममनोहर लोहिया ने जो भाषण दिया था वह आज भी प्रासंगिक है। उस वक्त डॉ लोहिया ने कहा था " सिंहासन और व्यापार के बीच संबंध भारत में जितना दूषित, भ्रष्ट और बेईमान हो गया है उतना दुनिया के इतिहास में कहीं नहीं हुआ है। " भ्रष्टाचार से देश की अर्थव्यवस्था और प्रत्येक व्यक्ति पर विपरीत प्रभाव पड़...
जाने क्या है सुचना का अधिकार २००५
संतोष तिवारी (सुचना अधिकार कार्यकर्ता ) 15 जून 2005 को इसे अधिनियमित किया गया और पूर्णतया 12 अक्टूबर 2005 को सम्पूर्ण धाराओं के साथ लागू कर दिया गया। सूचना का अधिकार अर्थात राईट टू इन्फाॅरमेशन। सूचना का अधिकार का तात्पर्य है, सूचना पाने का अधिकार, जो सूचना अधिकार कानून लागू करने वाला राष्ट्र अपने नागरिकों को प्रदान करता है। सूचना अधिकार के द्वारा राष्ट्र अपने नागरिकों को अपनी कार्य और शासन प्रणाली को सार्वजनिक करता है। लोकतंत्र में देश की जनता अपनी चुनी हुए व्यक्ति को शासन करने का अवसर प्रदान करती है और यह अपेक्षा करती है कि सरकार पूरी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपने दायित्वों का पालन करेगी। लेकिन कालान्तर में अधिकांश राष्ट्रों ने अपने दायित्वों का गला घोटते हुए पारदर्शिता और ईमानदारी की बोटियाँ नोंचने में कोई कसर नहीं छोड़ी और भ्रष्टाचार के बड़े-बड़े कीर्तिमान कायम करने को एक भी मौक अपने हाथ से गवाना नहीं भूले। भ्रष्टाचार के इन कीर्तिमानों को स्थापित करने के लिए हर वो कार्य किया जो जनविरोधी और अलोकतांत्रिक हैं। सरकारे यह भूल जाती है कि जनता ने उन्ह...
महा,ठाणे,मिरा भाईंदर महानगर पालिका: *खंबित का नया कमाल, फंस गए गुरु घंटाल*
भ्रष्टाचार पर PHD करने वाले महा-भ्रष्ट अधिकारी श्री दीपक खंबित पर संसार के सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी को रिसर्च करने की आवश्यकता है। कैसे सरकार के नजरों में अच्छा बनकर पैसा कमाया जाता है। Deepak Bhaskar Khambit Addl. City Engineer MBMC फंस जाने पर कैसे गुमराह कर जांच एजेंसियां से लेकर विभागीय अधिकारियों तक गुमराह किया जाता है यह कोई श्री खंबित से सीखना चाहिए। सन 1994 में मात्र2500 रुपए में 30 दिन आठ घंटे काम करने हेतु ठेका कर्मचारी ( डिप्लोमा होल्डर) से आज इस मिरा भयंदर शहर का सिटी इंजीनियर सभी को खुश रखते हुए बन गए है। जिनके पास आज भी डिप्लोमा ही है, मौजा नवघर के 122D में श्मशान हेतु आरक्षित भूमि है इस आरक्षित भूमि पर बिना शासन से मंजूरी लिए बिना ...
भारत से पहले रॉकेट छोड़ने वाला पाकिस्तान स्पेस प्रोग्राम में क्यों हुआ फेल
भारत से कई साल पहले शुरू हुआ था पाकिस्तानी स्पेस प्रोग्राम पाकिस्तानी 'सुपारको' की स्थापना 1961 में हुई थी जबकि भारतीय 'इसरो' की स्थापना करीब इसके 8 साल बाद 1969 में हुई थी. पाकिस्तान लंबी लंबी बातें तो बहुत करता है. अंतरिक्ष को लेकर भी उसने भारत से कहीं पहले अपने स्पेस प्रोग्राम की शुरुआत की थी लेकिन अब तो इस मामले में इतना पिछड़ चुका है कि जब वो अंतरिक्ष या चांद पर जाने की बात करता है तो खुद उसके देश के लोग ही उसकी हंसी उड़ाने लगते हैं. आखिर क्यों पाकिस्तान अंतरिक्ष के मामले में टांय-टांय फिस्स हो गया. हम सब ये जानते हैं कि भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो दुनिया की सबसे ताकतवर स्पेस एजेंसियों में से एक है. लेकिन क्या आपने पड़ोसी देश पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी सुपारको के बारे में सुना है.बहुत कम लोगों को मालूम है कि भारत से कई साल पहले शुरू हुआ था पाकिस्तानी स्पेस प्रोग्राम. सुपारको की स्थापना 1961 में हुई थी जबकि इसरो की स्थापना करीब इसके आठ साल बाद 1969 में हुई थी. साल 1960 में पाक में सबसे बड़े शहर कराची में पाकिस्तान-अमरीकी काउंसिल का लेक्चर ...




















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